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मैत्री केंद्र: पंचायत स्तर पर कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु सेवा
28 August 2026 · Pawan Kumar
मैत्री (MAITRI) का पूरा नाम “Multipurpose Artificial Insemination Technician in Rural India” है। हिंदी में इसका अर्थ “ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन” है।
मैत्री केंद्रों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर पशुपालकों को उनके गांव एवं घर तक कृत्रिम गर्भाधान और आवश्यक पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से किसानों को पशु प्रजनन संबंधी सेवाओं के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम होती है।
प्रशिक्षित मैत्री कार्यकर्ता गाय एवं भैंसों में हीट की पहचान, कृत्रिम गर्भाधान, गर्भाधान संबंधी रिकॉर्ड संधारण, पशुओं की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और पशुपालकों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत मैत्री मॉडल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के विस्तार, पशुओं की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। बिहार में भी पंचायत स्तर तक इन सेवाओं को पहुंचाने के लिए मैत्री कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
मैत्री के रूप में प्रशिक्षित ग्रामीण युवा पशुपालकों को घर-घर सेवा प्रदान करने के साथ स्वरोजगार का अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों को समय पर सेवाएं मिलती हैं और ग्रामीण पशुपालन व्यवस्था मजबूत होती है।
SCOPE AITI सैद्धांतिक शिक्षा, प्रयोगशाला अभ्यास, जीवित पशु पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्षेत्रीय अनुभव के माध्यम से कुशल कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।